शिव के हजार नाम । lord shiva name.

Bhagwan shiv ke hazar naam

भगवान शिव के हज़ारों नाम थे और कई सारे रूप थे जिसमें से हैम आपको 108 नाम बताएंगे । यह नाम अप्सबको भी मालूम होगा भगवान शिव के नाम उनके कर्म के अनुसार रखा गया था । हर नाम का अर्थ नाम के साथ लिखा है । इन नमो के बहुत है बहुमूल्य कीमत ह । आशा है कि आपको यह पसंद आएगी धन्य वाद 

क्या है भगवान शिव के नाम । और क्यों इनका हुवा ये नामकरण।

तो ये हैं भगवान शिव के 108 नाम जिनका अर्थ के साथ नीचे उल्लेख किया गया है । भगवान शिव को इन नमो से याद किया जाता है और उनकी पूजन और आरती में भी इन नमो का प्रयोग होगा है । भगवान शिव के कई ऐशी कार्य रही हैं जिनके कारण यह नाम उनके लिए बनाया गया ।
और देखें भगवान शिव जी के रूप बजरंग बली जी का  hanuman chalisa


● शिव के 108 नाम
1. पिनाकी - पिनाक नामक धनुष को धारण करने वाले ।
2. शिव - कल्याण स्वरूप वाले।
3. शम्भू - आनंद मय स्वरूप ।
4. महेश्वर - माया के अधिस्वर ।
5. सशिशेखर - शिर पर चंद्रमा धारण करने वाले।
6. वामदेव - स्वरूप से सुंदर ।
7. विरुपाक्ष - त्रिनेत्र धारी ।
8. निलोहित - निल और लाल रंग के ।
9. शंकर - कल्याण हित करने वाले ।
10. शूलपाणि - त्रिशूल धारण करने वाले।
11. खतवंगी - शीर के बल जटा जूट ।
12. विष्णुलाव -  श्री विष्णु जी के प्रिय।
13. शिपिविष्ट - ऊर्जा की किरणों का उत्सर्जन करने वाले प्रभु।
14. अम्बिकानाथ - माता पार्वती के पति ।
15. भक्तावतशाली - भक्तों का खयाल रखने वाले प्रभु ।
16. श्रीकंठ - सुंदर / आकर्षित कंठ वाले ।
17. भावा - स्वयं में ही अस्तित्व रखने वाले।।
18. शर्व - शभी दुख कस्ट हर्ता।
19. त्रिलोकेस - तीनो लोकों के मालिक।
20. स्वितिकन्थ - स्वेत रंग के कंठ वाले ।
21. शिवप्रिय - मा पार्वती के प्रिय।
22. उग्र - बहुत ही उग्र रूपी ।
23. कपाली - कपल को धारण करने वाले  ।
24. कामारि - कामदेव के दुश्मन।
25. अन्धकारसुरसुदन - अन्धका सुर के विनाशक ।
26. गंगाधर - गंगा जी के धारक ।
27. ललाटाक्ष - शेर पर आंख वाले ।
28. कालकाल - कालों के काल।
29. कृपानिधि - करुणा से भरपूर।
30. भीम - रुक हो जिसका भयंकर।
31. परशूहस्थ - फरसा को हाथ में धारण करने वाले।
32. मृगपनी - हिरण को हाथ मे धारण करने वाले।
33. जटाधर - बड़े केश को लपेट कर रखने वाले ।
34. कैलाशवासी - कैलाश पर रहने वाले ।
35. कवचि - कवच पहनने वाले।
36. कठोर - शरीर से बहुत ही मजबूत।
37. त्रिपुरांतक - त्रिपुरासुर का संहार करने वाले।
38. व्रिशांक - डंडे पर बैल के चिन्ह के साथ रखने वाले।
39. वरिष्ठमरूढ़ - ननंद के सवारी ककरने वाले।
40. भष्मोधूलितविग्रह - भष्म का लेप शरीर में लगाने वाले।
41. शम्प्रिय - सामगान से स्नेह करने वाले।
42. स्वरमई - हर एक स्वर में रहने वाले।
43. त्रिमूर्ति - जो विग्रह करे वेद रूपी।
44. अनीश्वर - जिसका कोई मालिक न हो।
45. सर्वज्ञ - हर चीज के ज्ञाता।
46. परमात्मा - अपना सबकुछ स्वाम।
47. सोमसूर्यग्निलोचन - सूरज , चंद और आग जैसे अंख वाले।
48. हवी - आहुति रूपी पानी वाले।
49. यज्ञमय - जो यज्ञस्वरूप हो।
50. सोम - उमा के रूप वाले भगवान ।
51. पंचवक्त्र - पंचमुखी स्वरूप वाले।
52. सदाशिव - सदा जान कल्याण करने वाले।
53. विश्रारेश्वर - सारे विश्व के ईश्वर ।
54. वीरभद्र - बहादुर होते हुए भी शांत ।
55. गननाथ - भक्त जने के स्वामी।
56. प्रजापति - भक्तों का पालन करने वाले।
57. हिरण्यरेत - तेज़ स्वर्ण वाले।
58. दुरघुर्ष - अटल रहने वाले निडर।
59. गिरीश - कैलाश पर्वत पर नींद लेने वाले।
60. अनध - पाप से सदैव दूर रहने वाले।
61. भुजंगभूषण - सांप को गले मे आभूषण जैसे रखने वाले।
62. महाकाल - कालों के काल ।
63. गिरीश - हिमालय के मालिक।
64. भर्ग - पापों का सजा देने वाले।
65. गिरिधानव - धनुष को मेरु पर्वत से बनाने वाले।
66. गिरिप्रिय - पर्वत से स्नेह रखने वाले।
67. कृतिवश - हाथी का चरम पहनने वाले ।
68. भगवान - हमेशा भक्तों की सहायता करने वाले।

69. पुरारती - अशुरो का संहार करने वाले।
70. प्रमथाधिपः - प्रमथ गांव के अधिपति ।
71. सूक्ष्मतनु - छोटे सरीर वाले।
72. मृतुयुंजय - मौत को हराने वाले।
73. जगद्वयपि - संसार में लुप्त होने वाले ।
74. जगतगुरु - विश्व के गुरु।
75. व्योमकेश - अश्मन के जैसे केश वाले।
76. महासेंजनक - भगवान कार्तिकेय के जन्मदहिनी ।
77. चरुविक्रम - सुंदर पराक्रम वाले।
78. रुद्र -  भक्तों के दुख में दुखी होने वाले।
79. भुत्पति - भूतों प्रेतों के पति ।
80. अष्टहनु - कुतष्ठा रूप वाले।
81. अहिबरिधन्य - कुंडलिनी को पहनने वाले ।
82. दिगम्बर - नग्न ।
83. अष्टमूर्ति - रूप हो जिसके आठ।
84. अनेकात्म - बिभिन्न रूपों को रखने वाले।
85. सात्विक - सत्व गुणों से समपर्ण।
86. सुद्धग्रह - स्वक्ष मूर्ति वाले।
87. सारस्वत - सत्य नित्य रहने वाले।
88. खण्डपरशु - टूटे हुवे फरषे वाले ।
89. अज - अमर ।
90. पाश्विमोचन - दुख हरने वाली ।
91. मृद - सदैव शुखि रहने वाले ।
92. पशुपति - पशुओं के देवता ।
93. देव - ऊर्जा के रूप वाले ।
94. महादेव - देवों के देवता ।
95. अव्यय - कभी नही खत्म होने वाले ।
96. हरि - विष्णु के स्वरूप।
97. पुषदंतभीत - पुश के दांत फाड़ने वाले।
98. अव्यर्ग - व्यथित न होने वाले ।
99. दक्षवाधर्वर - दक्ष के यज्ञक को भंग करने वाले ।
100. हर - दुख को हरने वाले ।
101. भगणेश्वरभिड़ - भग के अंख नस्ट करने वाले।
102. अव्यक्त - नारी के सामने प्रकट न होने वाले।
103. सहस्राक्ष - बहुत से आंखों वाले ।
104. सहस्रापड - बहुत से पैरों वाले।
105. अपवर्गप्रद - मोक्ष प्रदान करने वाले।
106. अनंत - परिछेड रहित।
107. तारक - तारण करने वाले।
108. परमेश्वर - सर्व प्रथम इसहवार
शिव के हजार नाम । shiv ke hazar naam
भगवान शिव का गण

Comments

Popular posts from this blog

Kya hai hanuman chalisa ?| kon hain iske racheta ?

Kya hai Shiv tandav stotram ?|kyun iski itni vyakhya ki jati hai ?