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पृथ्वी का निर्माण कैसे हुआ
भोले की भक्ति में सकती 
महाकाल के इतिहास की जानकारी
शिव की चर्चा , भजनावली
1. शिव गुरु की दृष्टि:-
     जिस वक्त श्रवत्र  केवल अंधेरा ही अंधेरा था , नही सूर्य थी न चंद , ग्रहो - नछत्रों का कहीं पता नही था , न दिन होता था न रात । प्रुथ्वी , जल और वायु की भी नामो निशान न था - उस शमय एकमात्र शिव का ही अस्तित्व था , जो अनादि और चिन्मय कहि जाती थी उन्ही भगवान सदाशिव को वेद , पुराण और उपनिषद तथा संत महात्मा ईश्वर कहते हैं ।

       एक बार भगवान शिव के मन मे सृष्टि रचने की इच्छा हुए|उन्होंने सोचा कि मैं एक से अनेक हो जाऊं । सह विचार आते ही सबसे पहले परमेश्वर शिव ने अपनी प्रा सकती से अम्बिका को प्रकट किया तथा उनसे कहा कि हमे सृस्टि  के लिए किसी दुषरे पुरुष का स्रजन करना चाहिये, जिसकी कंधे पर सृस्टि-संचालन का महान भार रखकर हम आनंदपूर्वक विचरण कर सकें । ऐश निश्चय करके सक्ती सहित परमेश्वर शिव ने अपने वाम अंडग के दशवें भाग पर अमृत मल दिया। वहां से तत्काल एक दिव्य प्रकट हुआ । उसका सौंदर्य
अतुलनीय था। उसमें सत्वगुण की प्रधानता थी। वह परम शांत तथा अथाह सागर की तरह गंभीर था। रेशम प…
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शिव के हजार नाम । lord shiva name. Bhagwan shiv ke hazar naam भगवान शिव के हज़ारों नाम थे और कई सारे रूप थे जिसमें से हैम आपको 108 नाम बताएंगे । यह नाम अप्सबको भी मालूम होगा भगवान शिव के नाम उनके कर्म के अनुसार रखा गया था । हर नाम का अर्थ नाम के साथ लिखा है । इन नमो के बहुत है बहुमूल्य कीमत ह । आशा है कि आपको यह पसंद आएगी धन्य वाद 
क्या है भगवान शिव के नाम । और क्यों इनका हुवा ये नामकरण। तो ये हैं भगवान शिव के 108 नाम जिनका अर्थ के साथ नीचे उल्लेख किया गया है । भगवान शिव को इन नमो से याद किया जाता है और उनकी पूजन और आरती में भी इन नमो का प्रयोग होगा है । भगवान शिव के कई ऐशी कार्य रही हैं जिनके कारण यह नाम उनके लिए बनाया गया । और देखें भगवान शिव जी के रूप बजरंग बली जी का  hanuman chalisa

● शिव के 108 नाम 1. पिनाकी - पिनाक नामक धनुष को धारण करने वाले । 2. शिव - कल्याण स्वरूप वाले। 3. शम्भू - आनंद मय स्वरूप । 4. महेश्वर - माया के अधिस्वर । 5. सशिशेखर - शिर पर चंद्रमा धारण करने वाले। 6. वामदेव - स्वरूप से सुंदर । 7. विरुपाक्ष - त्रिनेत्र धारी । 8. निलोहित - निल और लाल रंग के । 9. शंकर - क…
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Kya bhagwan hote hain ? Agar han to bhagwan kaun hai  bhagwan ? Aur kya hai bhagwan ke hone ka sabut?
क्या भगवान होते हैं ?। अगर हां तो को हैं भगवान?। और इनके होने की क्या सबूत है?। 

कहा जाता है कि इस सृष्टि के रचेता भगवान हैं । और इस पृथ्वी पर मनुष्य का जीवन होना भी भगवान की देन है । हैम जो हवा , पानी लेते हैं उसके वो भी भगवान ने बनाया है । और पृथ्वी पर अन्य जीवों का होना भी भगवान की देन है ।लेकिन वैज्ञानिक के अनुसार यह कहा जाता है कि मनुष्य और अन्य जीवों का पृथ्वी पे होना एक प्राकृतिक घटना है । कर इसमे सारि चीजें प्राकृतिक रूप से आए हैं । और इसमें विज्ञान की देन हैं नाकी भगवान की । क्या है भगवान के होने का सबूत ?Bhagwan ke hone ka sabut | अगर वैज्ञानिक के मुताबिक भगवान नही है । तो उनसे यह पूछिये की ताज महल किसने बनवाया ? वो कहेंगे इंसानो ने तो उनके पास इसका क्या सबूत ह? यही की इतने व्यवस्थित रुप में किसी भी चीज को प्रकृति नही रख सकती । जी हां तब जरा ये सोचिये की हमारे पृथ्वी को इतने व्यवस्थित रूप से किसने रखा? की उसपे मनुष्य का जीवन संभव हो पाया । सूरज से ठीक उतनी ही दूरी पे जा इतनी …
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Kya hai Shri durga chalisa ?  क्या है दुर्गा चालीसा?  । Aur ye hai durga chalisa lyrics । और दुर्गा चालीस की लिरिक्स । durga arti । दुर्गा आरतीJai maa durge ye hai maa durga jee ki chalisa jisme maa durga ka wistarit rup hai kripya isse padhen aur hame bataen ki isme koi galti to nahi  Yah sanskrit wisleshan hai shgra hee ham iska hindi vishleshan laenge Jay maa durge 
श्री दुर्गा चालीसानमो नमो दुर्गे सुख करनी । नमो नमो अम्बे दुःख हरनी ॥ निरंकार है ज्योति तुम्हारी । तिहूँ लोक फैली उजियारी ॥ शशि ललाट मुख महाविशाला । नेत्र लाल भृकुटी बिकराला ॥ रूप मातु को अधिक सुहावे । दरश करत जन अति सुख पावे ॥ तुम संसार शक्ति लय कीना । पालन हेतु अन्न धन दीना ॥ अन्नपूर्णा तुम जग पाला । तुम ही आदि सुन्दरी बाला ॥ प्रलयकाल सब नाशनहारी । तुम गौरी शिवशंकर प्यारी ॥
शिव योगी तुम्हरे गुन गावें । ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें ॥ रूप सरस्वती का तुम धारा । दे सुबुधि ऋषि-मुनिन उबारा ॥ धर्‍यो रूप नरसिंह को अम्बा । परगट भईं फाड़ कर खम्बा ॥ रक्षा करि प्रहलाद बचायो । हिरनाकुश को स्वर्ग पठायो ॥ लक्ष्मी रूप धरो जग जानी । श्री नारायण अंग समानी…

Kya hai Shiv tandav stotram ?|kyun iski itni vyakhya ki jati hai ?

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Kya hai Shiv tandav stotram ?|kyun iski itni vyakhya ki jati hai ? | Kyun karte the shiv jee (lord shiva) tandav?| Kya hai shiv tandav stotram ko padhne ke fayde ? Shiv tandav lyrics.______________________ क्या है शिव तांडव ? क्यों इसकी इतनी व्हख्य की जाती है? | क्यों करते थे भगवान शिव तांडव ?| क्या फायदे हैं शिव तांडव पढ़ने के | शिव तांडव(shiv tandav stotram) ravan के द्वारा किये जाने वाला तांडव (नृत्य) है जिससे ravan ने भगवान शिव को प्रभवित किया था और अमर होने का वरदान लिया था और जब भी भगवान शिव क्रोधित होते थे तब वे yah तांडव करते थे। वेद ऋषियों के अनुसार जब शिव जी क्रोधित होकर तांडव करते थे तब पृथ्वी पे भूकंप आता था और दुनिया मे भूचाल आजाता था ।
# Kya hai shiv tandav syotram?

Shiv tandav stotram  रावण ke द्वारा kiya gaya tandav ka hai.  Yah shiv jee ki arti hai jisse ham bhagwan shiv ko prabhawit karte hain aur unka ashirvad lete hain . क्या है शिव तांडव पढ़ने का फायदे ?
प्रात: शिवपुजन के अंत में इस रावणकृत shiv tandav stotram को गाने से लक्ष्मी स्थिर रहती हैं तथा भक्त रथ, गज, घोडा आ…

Kya hai hanuman chalisa ?| kon hain iske racheta ?

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Kya hai hanuman chalisa ?| kon hain iske racheta ? | Aur kya hanuman chalisa hanuman jee ki jiwan vyakhya karti hai ? |क्या है हनुमान चालीसा ?| कौन हैं इसके रचेता ?| और क्या हनुमान चालीसा हनुमान जी की जीवन व्याख्या करती है ?|

क्या है हनुमान चलिश ? और हनुमान चलिश में किसके बारे में बताया गया है Kya hai januman chalisa ? Aur hanuman chalisa me kiske bare me btaya gaya hai ?

हनुमान चालीसा (hanuman chalisa) हिंदुओं की एक धार्मिक किताब है ।
जो महावीर बजरंग बली (lord hanuman) के ऊपर लिखा गया है | और इसमें श्री हनुमान जी (hanuman) की जीवन व्यख्या की गई है | जैसे वह को थे | उनकी क्या महानता थी । कर किस प्रकार उन्होंने श्री राम की रावण से सुध में सहायता किया
Kon  hain iske lekhak ? कोंन हैं इसके लेखक?  Hanuman chalisa के लेखक तरह tulsi das jee हैं। यह पुस्तक उनके वीरता का वर्णन करती है । और कहा जाता है कि इसे पढ़ने से श्री hanuman jee का आशीर्वाद मिलता है और बाधाएं दूर होती हैं ।
#Hanuman chalisa  हनुमान चालीसा दोहा श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चा…